।। मनुष्य योनि का महत्व ।।
।। मानव जीवन का महत्व ।।
*नर तन सम नहिं कवनिउ देही। जीव चराचर जाचत तेही॥
नरक स्वर्ग अपबर्ग निसेनी। ग्यान बिराग भगति सुभ देनी॥5॥
भावार्थ:-मनुष्य शरीर के समान कोई शरीर नहीं है। चर-अचर सभी जीव उसकी याचना करते हैं। वह मनुष्य शरीर नरक, स्वर्ग और मोक्ष की सीढ़ी है तथा कल्याणकारी ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को देने वाला है॥5॥
* सो तनु धरि हरि भजहिं न जे नर। होहिं बिषय रत मंद मंद तर॥
काँच किरिच बदलें ते लेहीं। कर ते डारि परस मनि देहीं॥6॥
भावार्थ:-ऐसे मनुष्य शरीर को धारण (प्राप्त) करके भी जो लोग श्री हरि का भजन नहीं करते और नीच से भी नीच विषयों में अनुरक्त रहते हैं, वे पारसमणि को हाथ से फेंक देते हैं और बदले में काँच के टुकड़े ले लेते हैं॥6॥
विशेष ,,,,,, तामसिक आहार से यह दुर्लभ मनुष्य योनि आपके हाथ से चली जाएगी और आपकी जीवात्मा नरकलोक में ( पशु , पक्षी, सरी ,सरप एवं अनेक जीव जंतुओं में जन्म लेकर ) दुःख भोगेगी अतः तामसिक आहार से बचे ! देशी गाय का दूध तामस का उदय नहीं होने देता क्योंकि उसमे तत्व रूप ११ रूद्र है १२ आदित्य ही ८ वसु है २ अश्वनी कुमार है जो सभी देवता है ! ऐसे अमृत को पाने के लिए अपने प्रारब्ध ( भाग्य ) में पुण्य संचित करने के लिए अपने नजदीक की अथवा किसी देविक विचारो वाले पुरुषो की अच्छी गौशाला में दान कीजिये !
।। 🌷 उपवास 🕉🌷 ।।
जीवन में "उपवास" का बहुत ही महत्व है । उपवास को हम साधारणतः भूखे रहने को समझते हैं, लेकिन यह तो शरीर के स्वास्थ्य एवं मन की शुचिता के लिए है । शरीर के साथ साथ मन के पटल पर भी उपवास की ज़रूरत है । उपवास दो शब्दों के योग से बना है "उप" और "वास" । उप का अर्थ है "पास में" और वास का अर्थ है "रहना" । तो मन के पटल पर प्रभु के पास रहना ।
ऐसे उपवास में निम्न बातें ज़रूरी हैं १ ) अस्वाद - स्वाद से मुक्ति । भोज़न में स्वाद से मुक्ति , दूसरों की निन्दा शिकायत में आनेवाले स्वाद से मुक्ति । २ ) अबैर - किसी के प्रति बैर भाव का अभाव ।
३) अक्रोध - खुद को क्रोध वृत्ति से बचाने का प्रयास करना ४ ) अनिंदा - किसी की निन्दा से बचना । ५ ) परदोषदर्शन से बचना - जितना हो सके उपवास के वक्त हमें दूसरों का दोष न दिखे । ६ ) मौन - वाणी और मन का मौन । मौन में जितना कम बोल कर काम चल जाए ।
इतनी बातों का ध्यान रखते हुए प्रभु के निकट रहने का अर्थ हुआ उनके स्मरण ,भजन और उनकी कृपाओं को ध्यान में रखकर धन्यवाद करते हुए दिन व्यतीत करना । इतना सब करने पर ही प्रभु कृपा से "उपवास" रखना सफल होगा ।।
!! जय श्री राम ।।

0 टिप्पणियाँ